मशाल

हाथ फैलाए खड़ा है कभी हाथ चलाकर देख ले, बनती है क़िस्मत बनाने से भी कभी ख़ुद बनाकर देख ले, रो रहा है क्यों, क्या कोई आँसू पोंछने आएगा, आएगा जो भी यहाँ, अपना ही दुखड़ा गाएगा, पहाड़ भी हटता है रास्ते से कभी ख़ुद हटा कर देख ले। Advertisements

पहली नज़र का प्यार

पहली नज़र का प्यार, नहीं होता है बार बार, कभी आँखों में जा बसे, कभी हो जाता है दिल के आर पार। कभी एक लम्हा भर लगे, कभी उम्र भर का इंतज़ार। पहली नज़र का प्यार,

माधव का दिल

एक बार माधव को कुछ बेचैनी सी महसूस हुई, कई दिन तक उसे जब ठीक नहीं लगा तो वो वैध के पास गया। वैध के पूछने पर उसने बताया की उसे अंदर से बेचैनी लग रही है। कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। किसी काम में भी मन नहीं लगता। कोई इलाज बताइए, उसने वैध…

इंसाफ़

हमारी ग़लती भी जुर्म है उनका जुर्म भी माफ़ था, मासूम डरता फिर रहा है गुनहगार बैख़ौफ था। करोड़ों सपनों के क़ब्र पर सोने के महल बन रहे हैं, इंसानियत की आबरू लूट रही है शर्मसार इंसाफ़ था। सब ख़ुशहाल हों, बुद्धिजीवियों का अजीब प्रयास था,

यहाँ हर रिश्ते की बुनियाद ही स्वार्थ है

नित्य कहता हूँ कड़वा है पर परमार्थ है, यहाँ हर रिश्ते की बुनियाद ही स्वार्थ है। यहाँ हर एक का दुसरे से तब तक ही चलता है, जबतक जिसका जिससे जितना हित निकलता है। रिश्तों की मंडी में लेन देन ही असल कृतार्थ है, यहाँ हर रिश्ते की बुनियाद ही स्वार्थ है।

तो कितना अच्छा होता

ज़िन्दगी की राह में प्यार की बरसात न हुई होती तो कितना अच्छा होता, चलते चलते यूँ उनसे मुलाक़ात न हुई होती तो कितना अच्छा होता, उनसे मिलते ही अकेलेपन से ये कैसा रिश्ता सा जुड़ गया है, इस अकेलेपन से इस रिश्ते की शुरूआत न हुई होती तो कितना अच्छा होता।

ललकार

क्या हुआ जो सूरज ने गर्म आग बरसाए हैं,
क्या हुआ जो काले बादल आँधी बनकर आए हैं,
खड़े पड़े डट सीना ताने ज़ोर लगा ले जितना है,
चट्टान कहाँ हिला पाया ताक़त जो तुझमें इतना है।
मेरे आँखों का खारा पानी देख तू क्यों इठलाता है,
तुझे ज्ञान नहीं सागर का जिसका पानी खारा होता है।
इस खारे पानी में ना जाने कितने जीवन बसते हैं,
पता जिन्हें है इस बारे में वो आँसू पीकर हँसते हैं।
-आनन्द

एक वो दौर था एक ये दौर है।

एक वो दौर था, एक ये दौर है। कितना कुछ अब बदल गया है, बेफ़िक्री भी अब सँभल गया है, सूनी पड़ी हैं बरगद की शाखें, बचपन वो अब निकल गया है, भूलकर वो मासूम ऊधम अब, जीवन ख़ुदमें अब बन गई दौड़ है, एक वो दौर था, एक ये दौर है।

ओ कोयलया रे

कुके तू सबके द्वारे, सुना क्यों मेरा बसेरा ओ कोयलया रे, ओ कोयलया रे सुबह सभी के उजियारे, काला क्यों मेरा सवेरा, ओ कोयलया रे, ओ कोयलया रे कभी मुझे भी सुना दे मीठे गीत रे ओ कोयलया रे, ओ कोयलया रे

ऐ ज़िन्दगी

तुम नहीं तो हम नहीं ऐ ज़िन्दगी, तुम चल दिए हम है वहीं ऐ ज़िन्दगी, मुर्दा साँसें बेजान धड़कने, डुबती कश्ती में तैरती ये ज़िन्दगी, कितनी प्यारी होती है वो मौत जो, एक पल में सारे ग़म मिटा देती है, बार बार हँसकर ग़म देती है ये ज़िन्दगी। –अानंद

ज़िन्दगी में गर तु नहीं

कमी की कमी नहीं ज़िन्दगी में गर तु नहीं
सागर में लहर नहीं ज़िन्दगी में गर तू नहीं
होश को होश नहीं ख़ामोशी भी ख़ामोश नहीं
पानी में नमी नहीं ज़िन्दगी में गर तु नहीं
–अानंद

वो चले गए

उनसे रुखसत की शिकायत हमने कब की उनकी मर्ज़ी थी वो चले गए। शिकायत नहीं दर्द बयां कर रहा हु दोस्तों, बोहोत प्यार करते थे उनसे वो चले गए। पर उनकी रुखसत को तुम देखो गलत ना समझना ,